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द्विप्रज उन्नयन

सेरी 5 के परियोजना-क्ल्स्टर प्रोफाइल 

XII वीं योजना  (2012-2017)

भारत में द्विप्रज रेशम उत्पादन 

भारत सरकार द्वारा रारेप/जैका जैसे भिन्न परियोजना कार्यक्रमों के माध्यम से भारत में द्विप्रज रेशम उत्पादन विकसित करने हेतु किए गए प्रयासों ने केरेबो को उचित शहतूत किस्म, पैकेज प्रणाली, सीएसआर2 x सीएसआर4, सीएसआर4 x सीएसआर5, सीएसआर18xसीएसआर19 जैसे रेशमकीट संकर का विकास, उपयुक्त कीटपालन कार्यप्रणाली, रोग प्रबंधन, प्रायद्वीपीय भारत के उष्णकटिबंधीय मौसम के लिए उपयुक्त उन्नत धागाकरण प्रौद्योगिकी विकसित करने में सक्षम बनाया । इन प्रौद्यागिकी का प्रदर्शन दक्षिणी राज्यों में 3700 कृषकों तथा 298 धागाकारों के साथ बड़े पैमाने पर किया गया तथा इसके फलस्वरूप देश में द्विप्रज रेशम उत्पादन महत्वपूर्ण रूप में बढ़ा । भारत में कच्चा रेशम 1998-99 में 366 मी.टन से 2011-12 में 1685 मी.टन तक बढ़ा और 11.62% का वार्षिक यौगिक वृद्धि दर दर्ज किया । द्विप्रज रेशम वर्ष 1998-99 में देश के कुल रेशम उत्पादन का केवल 2.57% था जो 2011-12 में 7.15% तक बढ़ गया है ।

भारत में द्विप्रज के संवर्धन हेतु जैका कार्यक्रमों के अधीन की गई उपलब्धियों से उत्साहित होकर भारत सरकार ने अपने बारहवीं पंचवर्षीय योजना [2012-13 से 2016-17 तक] के अधीन विशेषत: ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए उत्प्रेरक विकास कार्यक्रम के कार्यान्वयन के माध्यम से आयात अनुकल्प के संवर्धन के द्वारा रोज़गार सृजन पर ज़ोर दिया है । शहतूत क्षेत्र पर मुख्य ध्यान द्विप्रज रेशम [3 ए ग्रेड एवं ऊपर] उत्पादन 197% [योजना से योजना] तक बढ़ाने के साथ 1685 मी.टन के वर्तमान उत्पादन स्तर से 5000 मी.टन तक बढ़ाने पर होगा । इस चुनौती भरे कार्य को प्राप्त करने के लिए बारहवीं योजना में अनुसंधान, विस्तार, बीज उत्पादन, कोसा उत्पादन प्रणाली, विपणन, साख सुविधा, नीति विकल्प के क्षेत्रों में द्विप्रज रेशम उत्पादन के संवर्धन में अनुकूल  परिवर्तन तथा निर्णय लेने के क्षेत्रों में पणधारियों की बढ़ती भागीदारी प्रस्तावित है ।

परियोजना में तैयार विस्तार प्रणाली को आधार बनाते हुए केन्द्रीय रेशम बोर्ड ने   XIIवीं योजना (2012-17) में पूरे भारत में लगभग 179 क्लस्टरों को तैयार करना प्रस्तावित किया है ।

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